Thursday, July 9, 2009

गीली मिटटी की खुशबु .....

दिल्ली में बारिश देखना दूभर हो गया है। एक तरफ़ मुंबई के आस पास का इलाका है जो बारिश से परेशां है और दूसरी तरफ़ यहाँ दिल्ली में लोग गर्मी से परेशान और बारिश के लिए दुआएं मांगते है. तपती गर्मी से झुलसते हुए लोगो को थोडी सी भी बारिश की बूँदें गिरती है तो एक अनोखी राह्त मिलती है। और जब थोडी सी भी तेज़ बारिश होती है तो आँगन में खड़े हो कर उस की टिप टिप को महसूस करने का आनंद ही कुछ और है। कभी बाहर देखो तो छोटे बच्चे बारिश में खेलते हुए नज़र आते है औ उनको बारिश में छम छम करते देखने में एक अलग ही खुशी मिलती है बारिश में बाहर का नज़ारा देखते ही बनताहै। पेड की हरियाली और भी खुबसूरत लगती है। लोगो के चेहरे पर एक चमक होती है। कभी आँखें बाँध कर सिर्फ़ बारिश के बारे में सोचने पर सबसे पहले मुझे याद आता है गीली मिटटी की खुशबु। अगर हम खुशबु को समेतके एक बोतल में बाँध कर पाते तो सबसे पहले मैं गीली मिटटी की खुशबु को रखती। बारिश में गीली मिटटी की महक एक अलग ही तरह का सुकून देता है। ऐसा लगता है की बारिश होती रहे और ये महक कभी ख़तम ही ना हो। आज जब हलकी हलकी बूंदें पड़ी और मिटटी की महक से मेरा मन भी महक गया तब बारिश में छम छम करने के बाद अपनी भावनाओं को यहाँ व्यक्त करने का सोचा। अगली बार जब बारिश हो तो अपनी हर परेशानी को कोने में रख कर सिर्फ़ बारिश में भीग कर और आनंद लेकर देखना। दुनिया की बड़ी से बड़ी खुशी से अच्छा होता है।
जीवन में इतनी भाग दोड़ करके थकने के बाद जब बारिश होती है तो अपने अन्दर के बच्चे को बाहर निकालना और बारिश में भीग कर देखना। तब महसूस की ज़िन्दगी कितनी खुबसूरत है और इसका हर पल कितनी खुशियाँ लाता है।

2 comments:

  1. Wow .. I'll surely try it out .. btw very nicely written .. Kash mai tumhari tarah likh paata to mere hindi ke essays mein full marks aa jaate :)

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  2. hi yaar likha toh kafi acha likha hai kya baat hai hmmmm........mast hai yaar ....samjh nahi aa raha hai ki kya bolu sab mast hai kafi aur eality bhi hai...

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